कुलभूषण जाधव पर आज भारत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में रखेगा अपने तर्क

पाकिस्तानी जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले की सुनवाई आज हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में होगी.

पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को जासूसी और आंतकवाद के आरोप में मौत की सज़ा सुनायी है.

भारत अदालत से पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव की सज़ा माफ़ करने का आदेश देने की गुज़ारिश करेगा. दूसरी ओर हाल ही में पुलवामा में हुए आत्मघाती चरमपंथी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बेहद बढ़ा हुआ है.

पाकिस्तान का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के अधिकारी हैं. उन्हें साल 2016 में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ़्तार किया गया था.

कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तानी सैन्य अदालत में मुक़दमा चला और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई.

पाकिस्तानी सरकार लंबे समय से भारत पर बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी समूहों की मदद करने के आरोप लगाती रही है.

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान से कहा था कि कुलभूषण को तब तक मौत की सज़ा न दी जाए जब तक अंततराष्ट्रीय अदालत में दायर भारत की याचिका पर सुनवाई पूरी न कर ली जाए.

भारत की याचिका पर सुनवाई 18 फ़रवरी यानी आज से शुरू हो रही है.

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय को दूसरे विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय मामलों को सुलझाने के लिए स्थापित किया गया था.भारतीय वकीलों की टीम अपने तर्क आज अदालत के समक्ष पेश करेगी.

इसके बाद मंगलवार को पाकिस्तान कुलभूषण जाधव पर लगे आरोपों से जुड़े सबूत और अपने दावे अदालत में पेश करेगा.भारत का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं और उन्हें भारत से ही अग़वा करके पाकिस्तान ले जाया गया था.

भारत का ये भी आरोप है कि पाकिस्तान सरकार ने कुलभूषण की भारतीय क़ानूनी मदद रोककर विएना कांफ्रेंस और मानवाधिकारों का भी उल्लंघन किया है.

पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने 10 अप्रैल 2017 को उन्हें जासूसी और दहशतगर्दी के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई थी.

2017 में ही पाकिस्तान ने कुलभूषण की पत्नी और मां को उनसे मिलने दिया था.

हालांकि भारत ने पाकिस्तान पर इन दोनों महिलाओं का उत्पीड़न करने के आरोप भी लगाए थे.जब हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान को कुलभूषण की मौत की सज़ा टालने का आदेश दिया तो पाकिस्तान ने बेहद ठंडा रवैया दिखाते हुए इसे मान तो लिया लेकिन ये भी कहा कि इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा और मौत की सज़ा बरकरार रहेगी.

हेग अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी होने और अंतिम फ़ैसला आने में कई महीनों का वक़्त लग सकता है.

आख़िरी बार अंतरराष्ट्रीय अदालत में पाकिस्तान और भारत 1999 में आमने-सामने आए थे. तब पाकिस्तान ने अपने एक नौ सैनिक जहाज़ पर हमले के मामले को हेग में उठाया था. इस हमले में सौलह लोगों की मौत हो गई थी.अंतरराष्ट्रीय अदालत ने दोनों ही देशों का पक्ष सुनने के बाद ये कहा था कि वो इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए अधिकृत नहीं है.

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