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Showing posts from December, 2018

शवदाह की तैयारी कर ख़ुदकुशी करने वाले किसान की कहानी

"वो घर से निकला था- पास के शहर से घर का कुछ सामान ख़रीदने. लेकिन लौटकर घर नहीं आया. घर आया, तो कुछ सामान - कुछ चूड़ियां, सफेद कपड़े का एक टुकड़ा, हल्दी, सिन्दूर और फूलों का एक हार . घर के लिए उसने यही सामान ख़रीदा था, लेकिन घर को इनमें से किसी सामान की ज़रूरत नहीं थी. दरअसल उसने ये सामान अपनी ही अर्थी को सजाने के लिए खरीदा था." ये सब बोलते-बोलते माधवय्या की आवाज़ भर्रा गई. माधवय्या के पिता मल्लप्पा आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में कम्बदुरुमंडल में पड़ने वाले रामपुरम गांव के किसान थे. अपनी अंतिम यात्रा के लिए ज़रूरी सारे सामान ख़रीदने के बाद उन्होंने ख़ुदकशी कर ली. मरने के बाद परिवार के लोग उन्हें याद रखें, इसके लिए उन्होंने अपनी एक लैमिनेटेड तस्वीर भी तैयार कर दी थी. उनके परिजनों ने बताया कि कर्ज़ में डूबे मल्लप्पा ने अगस्त 2018 में अपनी जान दे दी . फसल ख़राब हो गई थी और वो कर्ज़ चुकता करने में असमर्थ थे. अंतिम संस्कार का भार वो अपने परिवार पर नहीं डालना चाहते थे. यही कारण रहा होगा कि हमेशा के लिए आंखें बंद करने से पहले उन्होंने अपने शवदाह की व्यवस्था भी ख़ुद ही कर...

英国脱欧关键点 首相特蕾莎‧梅面临不信任投票

英国首相特蕾莎‧梅在推 迟脱欧草案在议会的表决后 ,面临执政保守党内部的不信任动议投票,领袖地位岌岌可危。 这意谓着英国的脱欧进程将可能面临更多的不确定因素。所谓“攘外必先安内”;在英国内部政局如此动荡的情况下,英国与欧盟的分 手协议将会有怎样的结果? 保守党下议院党团——1922委员会——在周三(12月12日)收集到了48名议员联署,符合启动对特蕾莎‧梅发动不信任投票的门槛。投票将在英国格林尼治标准时间下午6时至8时举行。预计结果将在晚间10点公布。 特蕾莎‧梅在首相府前发表声明, 表示将全力以赴争取在不信任 投票中获得多数保守党议员的支持。 根据英国保守党的章程, 特蕾莎·梅必须获得超过半数议员的支持,也就是158票。如果她成功,她的领袖地位将在未来一年时间免受挑战。 如果她不能成功获得足够票数的支持,保守党将展开领袖选举, 而特蕾莎·梅不能参选 。 英国脱欧 英国首相特蕾莎·梅面临的不信任投票,为脱欧局面带来更多的不确定因素。 特蕾莎·梅在首相府门前发表的声明中表示, 保守党改变领袖,将“危及我们国家的未来 ,造成我们承担不起的飘摇局面。” 脱欧,堪称英国自第二次世界大战以来最重大的政治和经济决定。最后的结果,不仅将塑造英国未来的经济地位, 也将关系到国家的统一 ,决定伦敦是否能继续保持国际金融中心的地位。

पुरुष नेताओं ने कब-कब दिए महिलाओं पर विवादित बयान

पिछले दिनों मौक़ा तो राजस्थान में चुनावी सभा का था लेकिन बातों-बातों में जनता दल (यू) के नेता शरद यादव कुछ ऐसा बोल गए, "वसुंधरा को आराम दो, बहुत थक गई हैं. बहुत मोटी हो गई है, पहले पतली थी . हमारे मध्य प्रदेश की बेटी है." शरद यादव के लफ़्ज़ों में कहें तो ये सिर्फ़ मज़ाक भर था पर वसंधुरा राजे ने कड़ा एतराज़ जताते हुए कहा कि वे इस बयान से अपमानित महसूस कर रही हैं. शरद यादव की कमान से ऐसा तीर पहली बार नहीं निकला है. वज़न का घटना-बढ़ना एक स्वभाविक सी बात है लेकिन क्या पुरुष राजनेताओं के मोटे होने पर इस तरह के सार्वजनिक बयान दिए जाते हैं ? बात सिर्फ़ वज़न की नहीं , अपने पहनावे, अपने रूप रंग या बर्ताव को लेकर भी अकसर महिलाएँ और महिला राजनेता पुरुष नेताओं के हाथों अश्लील , अभद्र और तौहीन भरी टिप्पणओं की शिकार होती रही हैं. परकटी महिलाएँ शुरुआत अगर शरद यादव से ही करें तो उन्हें जैसे इसमें महारत हासिल है. ये शरद यादव ही थे जिन्होंने जून 1997 में संसद में महिला आरक्षण बिल पर बहस में कहा था, "इस बिल से सिर्फ़ पर-कटी औरतों को फ़ायदा पहुंचेगा. परकटी शहरी महिलाएँ हमारी (ग्...